वनगांव, जनवरी 21: पश्चिम बंगाल में उत्तरी चौबीस परगना जिले की अदालत ने देशद्रोह मामले में लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकवादियों को मौत की सजा सुनाई है। इन आतंकवादियों में दो पाकिस्तानी नागरिक हैं। इन आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर में सेना के शिविरों पर हमले की साजिश रची थी लेकिन 2007 में भारत-बांग्लादेश सीमा पर पेत्रापोल के रास्ते भारत में घुसपैठ करते हुए सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।फास्ट ट्रैक अदालत के जज बिनय कुमार पाठक ने पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद यूनुस और अब्दुल तथा मुजफ्फर अहमद राठौड़ को मौत की सजा सुनाई। सुरक्षा एजेंसी ने जांच में खुलासा किया था की चारों आतंकी कश्मीर में सेना छावनी पर हमला करने के उद्देश्य से भारत में घुसे थे। शेख पाकिस्तान के करांची का रहने वाला है जबकि युनूस पाकिस्तान के ही हरिपुर का निवासी है। जबकि तीसरा आतंकी मुजफ्फर अहमद कश्मीर के अनंतनाग का रहने वाला है।

बता दें की वर्ष 2007 में अबदुल्ला व युनूस पाकिस्तान से ढाका पहुंचे। वहां मुजफ्फर व शेख अब्दुल नईम ऊर्फ समीर उनके साथ जुड गये। समीर महाराष्ट्र के औरंगाबाद का रहने वाला था। इसके बाद रात के अंधेरे में इन चारों ने पेट्रोपोल सीमा से भारत में प्रवेश किया। इस दौरान वे बीएसएफ की नजरों में आ गये। चार अप्रैल 2007 को बीएसएफ ने उन्हें हिरासत में लेकर वनगांव थाने के हवाले कर दिया। गिरफ्तार आतंकियों के पास से फर्जी वोटर कार्ड, ड्राइविग लाईसेंस, सिम कार्ड तथा भारी मात्रा में डालर व भारतीय रुपये बरामद किये गये। बाद में सीआईडी ने मामले की जांच की।

जांच के दौरान चारों आतंकियों को मुंबई ले जाया जा रहा था। इस दौरान समीर पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। उसके बाद से उसका कोई सुराग नहीं मिला। समीर के परिवार वालों ने पुलिस पर उसकी हत्या करने के आरोप लगाये थे। जुलाई 2012 में वनगांव अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हुई थी। लगभग पांच साल बाद इस मामले में अदालत ने अपना फैसला देते हुए तीनों आतंकियों को मौत की सजा सुनाई।