कराची, जनवरी 22: बलूचिस्तान और गिलगिट-बाल्टिस्तान के बाद अब पाकिस्तान के सिंध देश में भी अरबो डॉलर के विवादित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की सुविधा के लिए पाकिस्तानी सेना द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज बुलंद होने लगी है।चीनी उत्पीड़न के साथ ही पाकिस्तानी सेना की दमनकारी नीति के विरोध में ‘नो चाइना, गो चाइना’ की नारे की गूंज पूरे सिंध देश में फैल गयी है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा का में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। वहीं इस क्षेत्र की पार्टी जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज (जेएसएमएम) ने पूरे सिंध में सीपीईसी के खिलाफ व्यापक आंदोलन की घोषणा की है।

चीन द्वारा बनाया जा रहा यह आर्थिक गलियारा गिलगित-बाल्टिस्तान प्रांत से होकर गुजरेगा, जो की पाकिस्तान द्वारा हथियाए गए जम्मू-कश्मीर का एक हिस्सा है। गिलगित, पीओके और बलूचिस्तान के जैसे ही अब सिंध प्रांत के लोग भी पाकिस्तान से आजाद होकर एक स्वतंत्र सिंध देश की मांग कर रहा है।Embeded ObjectEmbeded Objectमीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया के मुताबिक सिंध क्षेत्र में कई चीन विरोधी प्रदर्शन हो रहे है। प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथ में अरबो के सीपीईसी योजना विरोधी नारे वाले बैनर लेकर लगातार उग्रवाद और धार्मिक आतंकवाद के विरोध में नारे लगा रहे है। साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शनकारी मानव अधिकारों के हनन को लेकर भी विरोध जता रहें हैं। जेएसएमएम के नेतृत्व में यह विशाल प्रदर्शन सिंधु राजमार्ग से शुरू होकर सेंट जीएम सैयद की कब्र तक खत्म हुयी। सेंट जीएम सैयद 20 वीं सदी के विद्वान और राजनेता थे जिन्होंने सिंधुदेश आंदोलन शुरू किया था।

इसदौरान जेएसएमएम नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपने नेता की कब्र और सिंधुदेश आंदोलन के शहीदों की कब्रों पर पुष्प माल्यार्पण किया और सिंधी नेता के 113 वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर अभिवादन के रूप में सिंधुदेश का राष्ट्रीय गान सुनाया।Embeded Objectजेएसएमएम के अध्यक्ष शफी मुहम्मद बरफात ने ट्वीट कर कहा, चीनी सेना के अतिक्रमण, विस्तार और राजनीतिक गठजोड़ से इस्लामी उग्रवाद एवं विश्व में आतंकवाद को गति मिलेगी। भविष्य में चीनी सेना का अतिक्रमण, विस्तार और राजनीतिक गठजोड़ विश्व शांति के लिए खतरनाक है।

उन्होने एक वीडियो संदेश में कहा की, सिंध हमेशा से एक स्वतंत्र देश है और यह राष्ट्र सदियों से अस्तित्व में है। बरफात ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को सिंधी और बलूच के लिए सांस्कृतिक, आर्थिक, भौगोलिक मौत का वारंट करार दिया है। यह एक ‘पंजाबी साजिश’ है जो की सिंध और बलूचिस्तान पर अपनी साम्राज्यवादी, विस्तारवादी वर्चस्व को मजबूत करने के लिए हो रहा है।Embeded Objectउन्होने कहा, सीपीईसी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष और परमाणु हथियारों की दौड़ में एक उत्प्रेरक के तौर पर काम करेगा जो की चीन द्वारा भारत के हिंद महासागर पर अपने अतिक्रमण के लिए सोची समझी साजिश है। जेएसएमएम के अध्यक्ष ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से कहा है की वें पाकिस्तान सरकार की क्रूरता और सिंधी एव बलूच राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर उनकी निर्दयता का तत्काल सज्ञान लें। साथ ही उन्होने जेएसएमएम के दिग्गज नेता उस्ताद मोहम्मद और दूसरों की गुमशुदगी की निंदा भी की।    शफी मुहम्मद बरफात ने सीपीईसी के विरोध में 20 फरवरी को पूरे सिंध प्रांत में बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। उन्होने चीनी साम्राज्यवादियों और सभ्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक ‘सीपीईसी अस्वीकार्य’ और ‘पंजाब की गुलामी नहीं सहने’ की बात पहुचाने के लिए सभी व्यापार संगठनों, वकीलों, पत्रकारों, छात्रों और हर सिंधी को इस आंदोलन में भाग लेने का आव्हान किया है।  

बता दें की पाकिस्तान का 70 फीसदी टैक्स सिंध प्रांत से आता है। सिंध में ही सबसे ज्यादा कच्चे तेल और नेचुरल गैस का उत्पादन होता है। इसके बावजूद यह पाकिस्तान के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक है। बंटवारे के वक्त सिंध के लोगों ने खुद ही पाकिस्तान में शामिल होने का समर्थन किया था। लेकिन इसके बाद से पाकिस्तान ने जिस तरह से यहां के लोगों का दमन किया है उससे उनका मोहभंग हो गया। इस साल 14 अगस्त को पाकिस्तानी आजादी को सिंध के लोगों ने काला दिवस के तौर पर मनाया।

रेपोर्ट्स के मुताबिक सीपीईसी परियोजना के लिए पाकिस्तान में मौजूद चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए करीब 17 हजार पाकिस्तानी सैनिक तैनात किए गए हैं। ये हाल अप्रैल से पहले का था लेकिन अप्रैल के बाद चार हजार और पाकिस्तानी सैनिकों की चीनी अधिकारियों की सुरक्षा में पाकिस्तान ने लगाए गए हैं।