सिलीगुडी, जनवरी 23: यूनेस्को की विश्व धरोहरों में शुमार दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के विकास व इसके संरक्षण को लेकर शुक्रवार को रेलमंत्री सुरेश प्रभु व यूनेस्को प्रतिनिधि मंडल के बीच फंड-इन-ट्रस्ट एग्रीमेंट साइन किया गया। भारतीय रेलवे बोर्ड के सचिव आरके वर्मा व यूनेस्को के निदेशक सिगारू ओयाजी ने दार्जिलिंग गोर्खा रंगमंच भवन में एक भव्य समारोह के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया।इस मौके पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि पूर्वोत्तर के साथ-साथ दार्जिलिंग में रेलवे का तेजी से विकास हो रहा है। आईआरसीटीसी के जरिये दार्जिलिंग क्षेत्र में पर्यटन उद्योग को बढावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रभु ने कार्यक्रम में मौजूद आईआरसीटीसी अधिकारियों को दार्जिलिंग गोर्खा टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन यानी जीटीए अधिकारियों के साथ इस बारे में विचार-विमर्श करते हुए भावी परियोजना तैयार करने का निर्देश दिया।

इसके साथ ही उन्होंने जीटीए क्षेत्र में काम कर रहे स्वनिर्भर दलों को आईआरसीटीसी की मदद से आगे बढाये जाने की बात कही। उन्होंने विश्व के सबसे उंचे हिल स्टेशन घूम को और अधिक विकसित करने तथा यहां यात्री टिकट सुविधा, यात्री निवास बनाये जाने की घोषणा की। यहां जंगल सफारी शुरू करने के लिए विशेष पैकेज दिये जाने संबंधी प्रस्ताव पर विचार करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने सिलीगुडी से दार्जिलिंग के बीच रेलवे ट्रैक बिछाने के कार्य में तेजी लाये जाने की बात कही।

उन्होंने कहा यह भी कहा कि पूर्व रेल बोर्ड रेलवे के विकास को लेकर गंभीर नहीं था, जिसके चलते कई दिक्कते होती रही है। जबकि वर्तमान रेल बोर्ड रेलवे के चौतरफा विकास के लिए सतत प्रयासरत है। आगामी रेल बजट में रेलवे की उपलब्धियां झलकेंगी। दार्जिलिंग से ही रेलमंत्री ने रिपोर्ट कंट्रोल के जरिये देश के विभिन्न हिस्सों में रेल परियोजनाओं व कार्यों का उदघाटन किया।

इस दौरान यूनेस्को के निदेशक सिगारू ओयाजी ने यूनेस्को व भारतीय रेलवे के बीच हुए इस ऐतिहासिक समझौते पर खुशी जताते हुए कहा कि यूनेस्को डीएचआर का पूर्ण विकास चाहता है। डीएचआर लोगों के बीच और अधिक लोकप्रिय बने इस दिशा में हम प्रयासरत हैं। डीएचआर के परिचालन में तकनीकी गडबडियां न हो इस बारे में प्रयास होनी चाहिए। उन्होंने इस कार्य में भारतीय रेल को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा डीएचआर के परिचालन की जिम्मेवार भले ही भारतीय रेल के जिम्मे है, लेकिन यूनेस्को की नजर हर समय इस पर होती है। उम्मीद करते है आनेवाले दिनों में यह विश्व पटल पर और अधिक लोकप्रियता हासिल करेगी।