चेन्नई, जनवरी 23: चेन्नई पुलिस ने जल्लीकट्टू समर्थकों द्वारा मरीना बीच को खाली नहीं करने पर आज सुबह सभी समर्थको को जबरन हटा दिया। पुलिस ने लाठी चार्ज के बाद समूचा मरीना बीच प्रदर्शनकारियों से खाली करा लिया है। इसदौरान कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी खबर है। जिसके बाद भीड़ ने हिंसक रूप लेते हुये पास के आइस हाउस पुलिस स्टेशन में आग लगा दी। बता दें की प्रदर्शनकारी इस मुद्दे के स्‍थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। कोयम्बटूर में भी पुलिस ने विरोध प्रदर्शन कर रहे 100 स्टूडेंट्स को हिरासत में लिया है। वहीं जलीकट्टू पर अध्यादेश के खिलाफ पेटा सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। बता दें की कल पुडुकोटटई जिले में जल्लीकट्टू के दौरान सांड़ों के हमले में दो युवकों की मौत हो गई और 57 घायल हो गए।चेन्नई की मरीना बीच पर पिछले 6-7 दिनों से जुटे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने सोमवार सुबह वहां से जबरन हटा दिया। पुलिस ने पहले उन्हें प्रदर्शन खत्म करने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं मानें, तो पुलिस को बल का इस्तेमाल करना पड़ा। लाठीचार्ज में काई प्रदर्शनकारी घायल भी हुए हैं। पुलिसकर्मी यहां जब इन प्रदर्शनकारियों को हटा रहे थे, तब वे लोग राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' गाने लगे। लाठीचार्ज के बाद पूरा इलाका खाली करा लिया गया है।

चेन्नई के अलावा मदुरै, कोयंबटूर और त्रिची से भी प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाया जा रहा है। पुलिस ने इस दौरान मरीना बीच को जाने वाले तमाम रास्ते बंद कर दिए, वहीं लोगों को इलाके के पास-पास इकट्ठा नहीं होने दिया जा रहा है। पुलिस के रूख को लेकर लोगों में खासी नाराजगी है, उनका कहना है कि वे इसी देश के हिस्सा हैं, उनके साथ पुलिस गलत व्यवहार कर रही है।

वहीं, दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ओ. पनीसेल्लम ने कहा है कि वो जल्द ही जलीकट्टू पर विधानसभा में मसौदा (बिल) पेश करेंगे, ताकि इसे लेकर स्थाई कानून बनाया जा सके। दरअसल जलीकट्टू को लेकर राज्य में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार ने एक अध्यादेश पारित कर सांडों को काबू करने से जुड़े इस पारंपरिक तमिल खेल की इजाजत दे दी थी, लेकिन ये प्रदर्शनकारी इस पर स्थायी समाधान की मांग को लेकर अब भी डटे थे। उनका कहना था कि ये अध्यादेश तो छह महीने बाद निरस्त हो जाएगा, इसलिए सरकार इस पर एक स्थाई कानून बनाए। वहीं पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि अध्यादेश छह महीने बाद निरस्त होने की बात गलत है। हकीकत यही है कि इस अध्यादेश के बाद अब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा।

उधर राज्य सरकार पशु अधिकारों से जुड़ी संस्था पेटा पर भी प्रतिबंध लगाने को लेकर कानूनी रास्ते तलाश रही है। गौरतलब है कि जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगाने में पेटा का अहम रोल देखा जा रहा है। पेटा ने साफ किया है कि जल्लीकट्टू पर आने वाले अध्यादेश को वह कानूनी चुनौती देंगे। पोंगल के वक्त खेले जाने वाले इस खेल को पशु अधिकार से जुड़े कार्यकर्ताओं की याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने 2014 में बैन लगा दिया था।