नई दिल्ली, जनवरी 24: प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सोमवार को अपने आवास पर 13 लड़कियों समेत 25 बच्‍चों को राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार प्रदान किए। इनमें से चार पुरस्‍कार मरणोपरांत दिए गए हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री ने वीरता पुरस्कार विजेता बच्चों से कहा कि उनका यह साहसी कार्य उनकी निर्णय लेने की क्षमता और पराक्रम को दर्शाता है। सर्वोच्‍च भारत पुरस्‍कार अरूणाचल प्रदेश की आठ वर्षीय स्‍वर्गीय कुमारी तारह पेजु को प्रदान किया गया है। तारह पेजु ने अपने दो दोस्‍तों को डूबने से बचाने का प्रयास करते हुए जान दे दी थी।प्रधानमंत्री ने पुरस्‍कार विजेताओं से कहा कि उन्‍हें अपनी इस उपलब्धि को अंत नहीं बल्कि आरंभ मानना चाहिए। उन्‍होंने बच्‍चों से अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए अध्‍ययन की प्रवृत्ति अपनाने को भी कहा। एक भारत श्रेष्‍ठ भारत का सपना अगर पूरा करना है तो हमें सहज रूप से हमारे देश के हर कोने को जानना लोगों को समझना यह सहज रूप से होना चाहिए। आपके जीवन में यह अवसर आया है पराक्रम का। क्‍या आप सर्वाधिक बायोग्राफी, ऑटो बायोग्राफी, जीवन चरित्र जितना ज्‍यादा हो सके अभी पढ़ना चाहिए।Embeded Objectप्रतिष्ठित गीता चौपड़ा पुरस्‍कार पश्चिम बंगाल की 18 वर्षीय तेजस्वीता प्रधान और 17 वर्षीय शिवानी गोंड को दिया गया है। इन दोनों लड़कियों ने अंतरराष्‍ट्रीय सेक्‍स स्‍कैंडल का भंडाफोड़ करने के लिए पुलिस और एक गैर सरकारी संगठन की मदद करने में असाधारण हिम्‍मत दिखाई, जिससे दिल्‍ली में इसका सरगना गिरफ्तार किया जा सका। संजय चौपड़ा पुरस्‍कार उत्‍तराखंड के 15 वर्षीय सुमित ममगाईं को प्रदान किया गया है।Embeded Objectबता दें कि इस साल के राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों के लिए देशभर से 25 बच्चों को चुना गया है जिसमें से 12 लड़कियां और 13 लड़के शामिल हैं। इन सबको इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर की ओर से चुना गया है। यह पुरस्कार पांच श्रेणियों में दिए जाते हैं भारत पुरस्‍कार, (1987 से), गीता चोपड़ा पुरस्‍कार, (1978 से), संजय चोपड़ा पुरस्‍कार, (1978 से), बापू गैधानी पुरस्‍कार, (1988 से), सामान्य राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार, (1957 से)।Embeded Objectगीता चोपड़ा पुरस्कार 18 साल की तेजस्विता प्रधान और 17 साल की शिवानी गोंद को दिया गया। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग की तेजस्विता और शिवानी ने सोशल मीडिया के जरिये अंतरराष्ट्रीय देह व्यापार गिरोह का भंडाफोड़ कर इस गिरोह के सरगना समेत तीन अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया था। वहीं संजय चोपड़ा पुरस्कार उत्तराखंड के 15 वर्षीय सुमित ममगंई को दिया गया। उसने बहादुरी का प्रदर्शन करते हुए तेंदुए से लड़कर अपने चचेरे भाई को बचाया था। केएम रोलहआहपूरी (13 वर्ष) मिजोरम (मरणोपरांत), छत्तीसगढ़ के मास्टर तुषार वर्मा (15 वर्ष) और मिजोरम के केएम लालहरितपुई (14 वर्ष) (मरणोपरांत) बापू गैधानी पुरस्कार प्रदान किया गया। तुषार वर्मा ने अपने खुद के जीवन को खतरे में डाल कर अपने पड़ोसी के शेड में आग बुझाई और कई मवेशियों को बचाया। लालहरितपुई ने एक कार दुर्घटना में चचेरे भाई को बचाने के प्रयास में अपने जीवन बलिदान दे दिया।Embeded Objectइसके अलावा समान्य वीरता पुरस्कार प्रफुल्ल शर्मा (हिमाचल प्रदेश), सोनू माली (राजस्थान), अकशिता शर्मा, अक्षित शर्मा, नमन (सभी दिल्ली से), अंशिका पांडे (उत्तर प्रदेश), निशा दिलीप पाटिल (महाराष्ट्र), सिया वामांसा खोडे (कर्नाटक), मोइरंगाथम सदानंद सिंह (मणिपुर), बिनिल मंजाले, अदिथ्यान पिल्लई, अखिल कुमार शिबू और बादारुन्नीसा (केरल से), तंकेशवर पेगु (असम), नीलम ध्रुव (छत्तीसगढ़), थांघिलमंग लुनकिम (नागालैंड), मोहन शेथी (ओडिशा) और देर पायल देवी (जम्मू-कश्मीर) को प्रदान किया गया।Embeded Objectसभी बहादुर बच्चे अब 26 जनवरी को राजपथ पर गणतंत्र दिवस की झांकी में शामिल होंगे और अपने बहादुर कारनामों से देश का नाम रोशन करेंगे। भारतीय बाल कल्याण परिषद ने 1957 में ये पुरस्कार शुरू किये थे। पुरस्कार के रूप में एक पदक, प्रमाण पत्र और नकद राशि दी जाती है। सभी बच्चों को विद्यालय की पढ़ाई पूरी करने तक वित्तीय सहायता भी दी जाती है।