नई दिल्ली, जनवरी 25: जल्लीकट्टू के समर्थन में शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ पुलिस की कार्यवाई पर राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। मंगलवार को आयोग ने चेन्नई में जल्लिकट्टू समर्थकों को तितर बितर करने में बल प्रयोग पर तमिलनाडु सरकार और राज्य पुलिस को नोटिस देकर जवाब मांगा है।जल्लीकट्टू समर्थको पर पुलिस ज्यादती की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और चेन्नई के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया। सभी को दो हफ्ते में इस संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया है। आयोग ने कहा कि रिपोर्ट को देखने पर प्रथम दृष्टया इस मामले में मानवाधिकार का उल्लंघन दिखता है।

एक बयान में आयोग ने कहा है कि उसने इस बारे में मीडिया की इन खबरों का स्वतः संज्ञान लिया है कि पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम के विधेयक-2017 के राज्य विधानसभा में पारित होने के बाद पुलिस ने चेन्नई में उमड़ी जल्लिकट्टू समर्थक भीड़ पर बिना चेतावनी के बल प्रयोग किया और उन्हें गिरफ्तार किया तथा निजी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाया।

बता दें की, चेन्नई पुलिस ने सोमवार सुबह जल्लीकट्टू समर्थकों पर लाठी चार्ज कर मरीना बीच जबरन खाली कराया था। इसदौरान कई प्रदर्शनकारियों के घायल हुये थे। जिसके बाद भीड़ ने हिंसक रूप लेते हुये पास के आइस हाउस पुलिस स्टेशन में आग लगा दी। कोयम्बटूर में भी पुलिस ने विरोध प्रदर्शन कर रहे 100 स्टूडेंट्स को हिरासत में लिया है। इससे पहले रविवार को पुडुकोटटई जिले में जल्लीकट्टू के दौरान सांड़ों के हमले में दो युवकों की मौत हो गई और 57 घायल हो गए थे।