कोलंबो, जनवरी 3: मछुआरों की समस्याओं के स्थाई समाधान के लिए लिए कोलंबो में भारत और श्रीलंका की उच्च स्तरीय बैठक सोमवार को आयोजित की गयी और इस समस्या के समाधान को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों और मंत्रियों ने सभी पहलुओं पर चर्चा की।
भारत की तरफ से कृषि और किसानों के कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह और श्रीलंका की ओर से वहां के मतस्य व तटीय विकास, सुरक्षा मंत्री महिंद्रा अमरावीरा समेत दोनों देशों के कई अधिकारी शामिल हुए। दोनों देशों के मंत्रियों की आम सहमति बनी की मतस्य और मछुआरों के लिए दोनों देशों की एक संयुक्त कार्यकारी समूह बनाया जाये जो स्थाई रूप से दोनों देशों के बीच होने वाली मछुआरों की समस्या का हाल निकाल सके |

Embeded Objectसाथ ही इसी समूह के जरिये दोनों देश के नाविक और मछुआरों की संभव हो सके। दोनों देशों के अधिकारियों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि जो भी मछुआरे दोनों ही देशों में हिरासत में रखे गए हैं उनकी अविलंब रिहाई कर दी जाएगी। दोनों देशों के मंत्रियों ने समुद्र क्षेत्र की तटीय सुरक्षा को लेकर भी आपसी सहमति जताई और कहा कि सुरक्षा के लिए पेट्रोलिंग में भी दोनों देश सहयोगात्मक रुख अख्तियार करेंगें। यह भी तय किया गया की जेडब्लूजी की अगली बैठक अप्रैल 2017 में कोलंबो में आयोजित होगी जिसमें ताजे हालत की समीक्षा होगी।

Embeded Objectबता दे कि, पिछले कुछ वर्षों में भारत के सैकड़ो मछुआरों श्रीलंकाई सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार कर लिया क्योंकि भारतीय मछुआरे मछली पकड़ने हेतु उनके सीमा में दाखिल हो जाते। इनमें ज़्यादातर तमिल नाडु के मछुआरे शामिल है। हालांकि श्रीलंकाई सुरक्षाबलों ने अपनी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर कई मछुआरों को रिहा कर दिया मगर अभी भी कई मछुआरे श्रीलंकाई जेल में है।

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