नई दिल्ली, जनवरी 5: चुनाव आयोग द्वारा बुधवार को पांच राज्यों के चुनाव तारीखों के ऐलान होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। बता दे कि सभी राजनैतिक दलों ने तल्ख तेवर अपनाए है। चुनाव के तारीखों के ऐलान के साथ ही चुनाव आयोग ने आचार संहिता भी लागू कर दिया।  
इस वजह से सभी विपक्षी दलों का कहना है कि आम बजट चुनाव के बाद पेश किया जाए। विपक्ष की इस मांग का केंद्र सरकार में एनडीए की सहयोगी शिवसेना ने भी समर्थन किया है। बता दे कि गुरुवार को आम बजट को टलवाने के लिए कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, जेडीयू, आरएलडी के नेता चुनाव आयोग पहुंचे।

विपक्षी दलों ने एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करने की योजना पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसके माध्यम से लुभावनी घोषणाएं कर भाजपा मतदाताओं को लुभा सकती है। चुनाव आयोग ने कहा है कि एक फरवरी को बजट पेश करने की योजना के खिलाफ राजनीतिक दलों द्वारा दिए गए एक ज्ञापन की वह जांच करेगा।

इस बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस कदम का बचाव करते हुए सवाल किया कि अगर राजनीतिक दल दावा करते हैं कि नोटबंदी एक अलोकप्रिय फैसला है तो उन्हें बजट से डर क्यों होना चाहिए। सभी राजनीतिक दलों का दावा है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में वह बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

कांग्रेस, वाम, सपा और बसपा सहित विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग को और राष्ट्रपति को पत्र लिख कर चुनाव से पहले बजट पेश किए जाने का विरोध किया है। इन दलों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले बजट पेश करने से भाजपा और उसके सहयोगियों को अनावश्यक तरीके से लाभ होगा, क्योंकि केंद्र सरकार मतदाताओं को लुभाने के लिए आकर्षक घोषणाएं कर सकती है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी को लिखे एक पत्र में कहा है कि, यह विपक्षी दलों की सामूहिक और गंभीर चिंता है कि एक फरवरी को बजट पेश किए जाने से सरकार को मतदाताओं को लुभाने के लिए लोकप्रिय घोषणाएं करने का अवसर मिल जाएगा। आजाद ने कहा, इससे न केवल सत्तारुढ़ दल को अनावश्यक लाभ मिलेगा बल्कि इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया भी कमजोर होगी। इसलिए यह मांग है कि आगामी चुनाव को देखते हुए और वर्ष 2012 के उदाहरण के अनुसार, बजट को पहले पेश करने की अनुमति न दी जाए।

उल्लेखनीय है कि देश में चुनाव के कुछ समय पहले ही चुनाव आयोग आचार संहिता लागू कर देती है। जिसके अनुसार कोई भी सरकार बजट पेश नहीं कर सकती क्योंकि सरकार बजट पेश कर वोटरों को लुभा सकती है।