नई दिल्ली, जनवरी 6: उच्चतम न्यायालय ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र बजट स्थगित करने की मांग की याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। जिसके बाद सभी विपक्षी दलों को झटका लगा है। विपक्षी दलों ने गुरुवार को निर्वाचन आयोग से मिलकर बजट को 8 मार्च तक बढ़ाने की मांग की थी। लेकिन एनडीए सरकार इसकी तिथि आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।उच्‍चतम न्‍यायालय ने केन्‍द्रीय बजट को पांच राज्‍यों में विधानसभा चुनाव के बाद मार्च तक बढ़ाने वाली याचिका पर तुरन्‍त सुनवाई से इंकार कर दिया है। अपील पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की पीठ ने कहा, ‘इस मामले में तत्काल सुनवाई करने की जरूरत नहीं है। हम उचित समय आने पर कानून के मुताबिक विचार करेंगे, लेकिन अभी नहीं।’

बता दें की मोदी सरकार ने पहली बार बजट सत्र तय समय से पहले कराने का फैसला मंगलावर को लिया। जिसके महज एक दिन बाद ही चुनाव आयोग ने पांच राज्यों उत्तरप्रदेश, पंजाब, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर की 690 विधानसभा सीटों पर चुनाव तारीखो का ऐलान भी कर दिया। साथ ही सभी राज्यों में आचार संहिता भी लागू हो गया है। जिसके मद्दे नजर सभी विपक्षी दल केंद्र से बजट को चुनाव बाद पेश करने की मांग कर रहे है जिसे सरकार ने नकार दिया है।

विपक्षी दलों का आरोप है की केंद्र द्वारा पेश बजट चुनाव परिणामो पर प्रभाव डाल सकता है। वही दूसरी ओर मोदी सरकार ने कहा है की चुनाव तारीखों के ऐलान किए जाने से पहले ही सरकार ने बजट की तारीखों का ऐलान कर दिया था।       

केंद्र सरकार के मुताबिक संसद का बजट सत्र इस बार 31 जनवरी से शुरू होकर 9 फरवरी तक चलेगा। वहीं 31 जनवरी को संसद में राष्‍ट्रपति का अभिभाषण होगा और इस दिन आर्थिक सर्वे पेश किया जाएगा। क्योंकि सरकार चाहती है कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए धन का आवंटन एक अप्रैल से हो जाए। वहीं इस बार रेलवे बजट खत्म किया गया है जिसके बाद आम बजट के साथ रेल बजट पेश होगा।